हेलो फ्रेंड्स मैं रिचर्ड मैं आज आपको अपने बारे मे बताने जा रहा हु की कैसे
मेने अपनी लाइफ की कहानी की शुरुआत की। मेरा जन्म पांच मई 1994 को
दिल्ली के तिगड़ी इलाके में हुआ। मेने अपनी स्कूल की शुरुआत योगी अरविन्द सर्वोदय विद्यालय से सुरु की सन 2012 में मेने अपनी 12 वी कक्षा यहाँ से पास की। में आपको बताना चाहूंगा की किस तरह से मेने अपनी लाइफ में उतार चढ़ाव देखे है। में एक छोटे परिवार से ब्लोंग करता हूँ मेरी लाइफ में सबसे इम्पोर्टेन्ट है मेरे माँ बाप उन्होंने मुझे काफी अच्छे से सपोर्ट किया और मुझे आगे बढ़ने में उनकी वजह से मदद मिली। बात करते है मेरी माँ की उन्होंने मुझे पढ़ाने के लिए सिलाई का काम भी किया और मेरी पढाई में मदद की। यह बात उन दिनों की है जब में 10 वर्ष का था मेरी माँ मेरे लिए दिन रात महनत करती थी ताकि में अच्छे से पढ़ सकू। पर पता नहीं क्यों में अच्छे से नहीं पढ़ सका और अच्छे नंबर नहीं ला सका क्यूंकि हमारे देश में 10 और 12 के मार्क्स को ही जरूरी समझा जाता है। में बचपन से ही खेल में मस्त रहता था। मेरा शौक था ड्राइंग का में काफी अच्छे से ड्राइंग कर लेता था मेरे सारे दोस्त भी स्कूल में मुझसे ही ड्राइंग करवाते थे मुझे बचपन से ही ड्राइंग का टीचर कह लो या फिर स्केच आर्टिस्ट बनना था पर में वह नहीं कर सका। मेरा दिमाग कभी भी एक जगह नहीं टिकता था। मुझे सभी काम करने का शोक था। में ड्राइंग के साथ स्पोर्ट्स में भी अच्छी रूचि रखता था। मेरे 1 क्लास से 6TH क्लास तक के जो बेस्ट फ्रेंड्स थे उनमे से एक था यादवेन्दर ( जिसको हम पिंकी कहकर भी बुलाते थे) और नरेंदर जिसको में सरदार बुलाता था। इनमे से मेरे और भी दोस्त थे जो मेरे साथ पड़ते थे जैसे सौरव, दानिश, प्रिंस ,स्वेता और हम सबकी प्यारी रजनी मैडम जो बच्चो से बहुत प्यार करती थी। हमने उनके टाइम पर बहुत मजे लिए है स्कूल लाइफ में 1st क्लास में हमें वही पढ़ाती थी।
मेने अपनी लाइफ की कहानी की शुरुआत की। मेरा जन्म पांच मई 1994 को
दिल्ली के तिगड़ी इलाके में हुआ। मेने अपनी स्कूल की शुरुआत योगी अरविन्द सर्वोदय विद्यालय से सुरु की सन 2012 में मेने अपनी 12 वी कक्षा यहाँ से पास की। में आपको बताना चाहूंगा की किस तरह से मेने अपनी लाइफ में उतार चढ़ाव देखे है। में एक छोटे परिवार से ब्लोंग करता हूँ मेरी लाइफ में सबसे इम्पोर्टेन्ट है मेरे माँ बाप उन्होंने मुझे काफी अच्छे से सपोर्ट किया और मुझे आगे बढ़ने में उनकी वजह से मदद मिली। बात करते है मेरी माँ की उन्होंने मुझे पढ़ाने के लिए सिलाई का काम भी किया और मेरी पढाई में मदद की। यह बात उन दिनों की है जब में 10 वर्ष का था मेरी माँ मेरे लिए दिन रात महनत करती थी ताकि में अच्छे से पढ़ सकू। पर पता नहीं क्यों में अच्छे से नहीं पढ़ सका और अच्छे नंबर नहीं ला सका क्यूंकि हमारे देश में 10 और 12 के मार्क्स को ही जरूरी समझा जाता है। में बचपन से ही खेल में मस्त रहता था। मेरा शौक था ड्राइंग का में काफी अच्छे से ड्राइंग कर लेता था मेरे सारे दोस्त भी स्कूल में मुझसे ही ड्राइंग करवाते थे मुझे बचपन से ही ड्राइंग का टीचर कह लो या फिर स्केच आर्टिस्ट बनना था पर में वह नहीं कर सका। मेरा दिमाग कभी भी एक जगह नहीं टिकता था। मुझे सभी काम करने का शोक था। में ड्राइंग के साथ स्पोर्ट्स में भी अच्छी रूचि रखता था। मेरे 1 क्लास से 6TH क्लास तक के जो बेस्ट फ्रेंड्स थे उनमे से एक था यादवेन्दर ( जिसको हम पिंकी कहकर भी बुलाते थे) और नरेंदर जिसको में सरदार बुलाता था। इनमे से मेरे और भी दोस्त थे जो मेरे साथ पड़ते थे जैसे सौरव, दानिश, प्रिंस ,स्वेता और हम सबकी प्यारी रजनी मैडम जो बच्चो से बहुत प्यार करती थी। हमने उनके टाइम पर बहुत मजे लिए है स्कूल लाइफ में 1st क्लास में हमें वही पढ़ाती थी।
